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NCERT · Class 10 · Social Science · Economics: Consumer RightsDescribe the three-tier quasi-judicial machinery established under COPRA, 1986 for consumer dispute redressal.

Step-by-Step Solution

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 (COPRA) ने पीड़ित उपभोक्ताओं को त्वरित, सस्ती और सरल न्याय प्रदान करने के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक अनूठी और प्रभावी त्रि-स्तरीय अर्ध-न्यायिक उपभोक्ता विवाद निवारण तंत्र की स्थापना की। जमीनी स्तर पर, जिला मंच (अब जिला आयोग) 1 करोड़ रुपये तक के दावों और मुआवजे से जुड़े उपभोक्ता विवादों से निपटता है। यदि कोई उपभोक्ता जिला मंच के फैसले से संतुष्ट नहीं है, तो वह राज्य आयोग में अपील कर सकता है, जो 1 करोड़ रुपये से अधिक और 10 करोड़ रुपये तक के दावों वाले मामलों को संभालता है। शीर्ष स्तर पर, राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) नई दिल्ली में कार्य करता है, जो 10 करोड़ रुपये से अधिक के दावों वाले प्रमुख मामलों से निपटता है, साथ ही राज्य आयोगों के आदेशों के खिलाफ अपीलों की सुनवाई करता है। यह पदानुक्रमित संरचना यह सुनिश्चित करती है कि उपभोक्ताओं के पास अपनी शिकायतों को उठाने, महंगे वकीलों को काम पर रखे बिना अपने मामलों को प्रस्तुत करने और अनुचित व्यापार प्रथाओं, लापरवाही या व्यावसायिक उद्यमों द्वारा बेचे गए दोषपूर्ण उत्पादों के कारण हुए नुकसान के लिए उचित मुआवजा प्राप्त करने के लिए सुलभ मंच हों।

💡 Study Guide: This question tests core syllabus concepts from Economics: Consumer Rights. For formulas, key summaries, and mock exam reference guides, read the full Economics: Consumer Rights Revision Notes.
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